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एक बहुत बड़ा सरोवर था। उसके तट पर मोर
रहता था, और वहीं पास एक
मोरनी भी रहती थी। एक दिन मोर
ने मोरनी से प्रस्ताव रखा कि- “हम
तुम विवाह कर लें,
तो कैसा अच्छा रहे?”
मोरनी ने पूछा- “तुम्हारे मित्र
कितने है ?”
मोर ने कहा उसका कोई मित्र
नहीं है।
तो मोरनी ने विवाह से इनकार कर
दिया।
मोर सोचने लगा सुखपूर्वक रहने के
लिए मित्र बनाना भी आवश्यक है।
उसने एक सिंह से.., एक कछुए से.., और
सिंह के लिए शिकार का पता लगाने
वाली टिटहरी से.., दोस्ती कर लीं।
जब उसने यह समाचार
मोरनी को सुनाया, तो वह तुरंत
विवाह के लिए तैयार हो गई। पेड़ पर
घोंसला बनाया और उसमें अंडे दिए, और
भी कितने ही पक्षी उस पेड़ पर रहते
थे।
एक दिन शिकारी आए। दिन भर
कहीं शिकार न मिला तो वे उसी पेड़
की छाया में ठहर गए और सोचने लगे,
पेड़ पर चढ़कर अंडे- बच्चों से भूख बुझाई
जाए।
मोर दंपत्ति को भारी चिंता हुई,
मोर मित्रों के पास सहायता के लिए
दौड़ा। बस फिर क्या था..,
टिटहरी ने जोर- जोर से
चिल्लाना शुरू किया। सिंह समझ गया,
कोई शिकार है। वह उसी पेड़ के नीचे
चला.., जहाँ शिकारी बैठे थे। इतने में
कछुआ भी पानी से निकलकर बाहर आ
गया।
सिंह से डरकर भागते हुए
शिकारियों ने कछुए को ले चलने
की बात सोची। जैसे ही हाथ
बढ़ाया कछुआ पानी में खिसक गया।
शिकारियों के पैर दलदल में फँस गए।
इतने में सिंह आ पहुँचा और उन्हें ठिकाने
लगा दिया।
मोरनी ने कहा- “मैंने विवाह से पूर्व
मित्रों की संख्या पूछी थी, सो बात
काम की निकली न, यदि मित्र न
होते, तो आज हम सबकी खैर न थी।”
मित्रता सभी रिश्तों में
अनोखा और आदर्श रिश्ता होता है।
और मित्र
किसी भी व्यक्ति की अनमोल
पूँजी होते है।

अगर गिलास दुध से भरा हुआ है तो आप उसमे और दुध नहीं डाल
सकते । लेकिन आप उसमे शक्कर डाले । शक्कर अपनी जगह
बना लेती है और अपना होने का अहसास दिलाती है उसी प्रकार
अच्छे लोग हर किसी के दिल में अपनी जगह बना लेते हैं….
अपने प्रिय दोस्तों को फोर्वोर्ड करो मैंने तो कर दिया..ध्यान से पड़ने के लिऎ धन्यवाद और बनाये अच्छे दोस्त



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एक समय की बात है कि एक गांव में एक बहुत उदार तथा दयालु नन्हीं लड़की रहती थी। वह थी तो अनाथ, पर ऐसा लगता था जैसे सारा संसार उसी का है। वह सभी से प्रेम करती थी और दूसरे सब भी उसे बहुत चाहते थे।
पर दुख की बात यह थी कि उसके पास रहने के लिए कोई घर नहीं था। एक दिन इस बात से वह इतनी दुखी हुई कि उसने किसी को कुछ बताए बिना ही अपना गांव छोड़ दिया। वह जंगल की ओर चल दी। उसके हाथ में बस एक रोटी का टुकड़ा था।
वह कुछ ही दूर गई थी कि उसने एक बूढ़े आदमी को सड़क के किनारे बैठे देखा। वह बूढ़ा-बीमार-सा लगता था। उसका शरीर हड्डियों का ढांचा मात्र था। अपने लिए स्वयं रोटी कमाना उसके बस का काम नहीं था। इसलिए वह भीख मांग रहा था।
उसने आशा से लड़की की ओर देखा।
‘‘ओ प्यारी नन्हीं बिटिया ! मैं एक बूढ़ा आदमी हूं। मेरी देखभाल करने वाला कोई नहीं है। मेहनत-मजदूरी करने की मेरे शरीर में शक्ति नहीं, तीन दिन से मैंने कुछ नहीं खाया है। मुझ पर दया करो और मुझे कुछ खाने को दो।’’ वह बूढ़ा व्यक्ति गिड़गिड़ाया।

नन्हीं लड़की स्वयं भी भूखी थी। उसने रोटी की टुकड़ा इसलिए बचा रखा था ताकि खूब भूख लगने पर खाए। फिर भी उसे बूढ़े व्यक्ति पर दया आ गई। उसने अपना रोटी का टुकड़ा बूढ़े को खाने के लिए दे दिया।
वह बोली-‘‘बाबा, मेरे पास बस यह रोटी का टुकड़ा है। इसे ले लो, काश ! मेरे पास और कुछ होता।’’
इतना कहकर और रोटी का टुकड़ा देकर व आगे चल पड़ी। उसने मुड़कर भी नहीं देखा।
वह कुछ ही दूर और आगे गई थी कि उसे एक बालक नजर आया, जो ठंड के मारे कांप रहा था। उदार और दयालु तो वह थी ही, उस ठिठुरते बालक के पास जाकर बोली-‘‘भैया, तुम तो ठंड से मर जाओगे। मैं तुम्हारी कुछ सहायता कर सकती हूँ ?’’

बालक ने दयनीय नजरों से नन्हीं लड़की की ओर देखा-
‘‘हां दीदी ! यहां ठंड बहुत है। सिर छुपाने के लिए घर भी नहीं है मेरे पास। क्या करूं ? तुम्हारी बहुत कृपा होगी यदि तुम मुझे कुछ सिर ढंकने के लिए दे दो।’’ छोटा बालक कांपता हुआ बोला।
नन्हीं लड़की मुस्कुराई और उसने अपने टोपी (हैट) उतारकर बालक के सिर पर पहना दी। बालक को काफी राहत मिली।
‘‘भगवान करे, सबको तुम्हारे जैसी दीदी मिले। तुम बहुत उदार व कृपालु हो।’’ बालक ने आभार प्रकट करते हुए कहा, ‘‘ईश्वर तुम्हारा भला करे।’’
लड़की मुंह से कुछ बोली नहीं। केवल बालक की ओर प्यार से मीठी-सी मुस्कराहट के साथ देखकर आगे बढ़ गई।
वह सिर झुकाकर कुछ सोचती चलती रही।

आगे जंगल में नन्हीं लड़की को एक बालिका ठंड से कंपकंपाती हुई मिली, जैसे भाग्य उसकी परीक्षा लेने पर तुला था। उस छोटी-सी बालिका के शरीर पर केवल एक पतली-सी बनियान थी। बालिका की दयनीय दशा देखकर नन्हीं लड़की ने अपना स्कर्ट उतार कर उसे पहना दिया और ढांढस बंधाया-‘‘बहना, हिम्मत मत हारो। भगवान तुम्हारी रक्षा करेगा।’’
अब नन्हीं लड़की ने तन पर केवल स्वेटर रह गया था। वह स्वयं ठंड के मारे कांपने लगी। परंतु उसके मन में संतोष था कि उसने एक ही दिन में इतने सारे दुखियों की सहायता की थी। वह आगे चलती गई। उसके मन में कोई स्पष्ट लक्ष्य नहीं था कि उसे कहां जाना है।
अंधेरा घिरने लगा था। चांद बादलों के पीछे से लुका-छिपी का खेल खेल रहा था। साफ-साफ दिखाई देना भी अब बंद हो रहा था। परंतु नन्हीं लड़की ने अंधेरे की परवाह किए बिना ही अनजानी मंजिल की ओर चलना जारी रखा।
एकाएक सिसकियों की आवाज उसके कानों में पड़ी। ‘यह कौन हो सकता है ?’ वह स्वयं से बड़बड़ाई। उसने रुककर चारों ओर आंखें फाड़कर देखा।

‘‘ओह ! एक नन्हा बच्चा !’’ नन्हीं लड़की को एक बड़े पेड़ के पास एक छोटे से नंगे बच्चे की आकृति नजर आ गई थी। वह उस आकृति के निकट पहुंची और पूछा-‘‘नन्हें भैया, तुम क्यों रोते हो ? ओह हां, तुम्हारे तन पर तो कोई कपड़ा ही नहीं है। हे भगवान, इस बच्चे पर दया करो। यह कैसा अन्याय है कि एक इतना छोटा बच्चा इस सर्दी में नंगा ठंड से जम रहा है !’’ उसका गला रुंध गया था।
नन्हें बच्चे ने कांपते और सिसकते हुए कहा-‘‘द-दीदी, ब…बहुत कड़ाके की सर्दी है। मुझ पर दया करो। कुछ मदद करो।’’’‘‘हां-हां, नन्हे भैया। मैं अपना स्वेटर उतारकर तुम्हें दे रही हूं। बस यही कपड़ा है मेरे पास। लेकिन तुम्हें इसकी मुझसे अधिक जरूरत है।’’ ऐसा कहते हुए नन्हीं लड़की ने स्वेटर छोटे बच्चे को पहना दिया।
अब उसके पास तन पर कपड़े के नाम पर एक धागा भी नहीं रह गया था।
वह रुकी नहीं। चलती रही। इसी प्रकार चलते-चलते वह जंगल में एक खुली जगह जा पहुंची। वहां से आकाश दीख रहा था और दीख रहे थे बादलों से लुका-छिपी खेलता चांद तथा टिम-टिम करते तारे।
अब सर्दी बढ़ गई थी और ठंड असहनीय हो गई थी। नन्हीं लड़की का शरीर बुरी तरह कांपने लगा था और दांत किटकिटा रहे थे।

उसने सिर उठाकर आकाश की ओर देखा और एक आह भरी। फिर आंखों में छलकते आंसुओं के साथ वह नन्हीं लड़की बोली-‘‘हे प्रभु, मैं नहीं जानती कि कौन-सी शक्ति मुझे यहां खींच लाई है ! मैं यहाँ क्यों आई ! पर मुझे विश्वास हो रहा है कि यदि यहां से मैं तुमसे विनती करूं तो तुम अवश्य मेरी आवाज सुनोगे। मेरे सामने फैली झील, आकाश की ओर उठते ये सुन्दर-सुंदर पेड़ दूर नजर आती बर्फ से ढकी पर्वतों की चोटियां, आकाश का चांद तथा झिलमिलाते सितारे तुम्हें अर्पित मेरी प्रार्थना के साक्षी है।’’ ऐसा कहते हुए वह फफक कर रो पड़ी।
काफी समय बाद वह संयत हुई। उसने फिर प्रार्थना की-‘ईश्वर, क्या मैं जान सकती हूं कि तुमने मेरे माता-पिता क्यों छीन लिए जबकि मुझे उनकी छत्र-छाया की बहुत आवश्यकता थी ? मुझे अनाथ बनाकर तुम्हें क्या मिला ? इस सारे ब्रह्मांड के तुम स्वामी हो, पर मुझे रहने के लिए एक छोटा-सा घर भी नहीं मिला ? क्या यही तुम्हारा न्याय है ?
यही नहीं तुमने मेरे हाथ का वह रोटी का छोटा-सा टुकड़ा भी ले लिया। इस शीत भरी रात में तुम्हारे संसार में इतने सारे छोटे-छोटे बच्चे बेसहारा और बेघर बाहर जंगल में पड़े भूखे नंगे ठिठुर रहे हैं कि मुझे अपने भी एक-एक करके उतारकर उन्हें देने पड़े। परिणामस्वरूप मैं तुम्हारे सामने वस्त्रहीन खड़ी हूं।’
नन्हीं लड़की सांस लेने के लिए रुकी।

कुछ देर पश्चात उसने भर्राए गले से उलाहना दी-‘मैंने कभी तुमसे शिकायत नहीं की। न ही तुम्हें कोसा परंतु इसका अर्थ यह नहीं है कि मेरी कोई भावनाएं ही नहीं है या मेरा हृदय पत्थर है। खैर, मेरे माता-पिता की छोड़ो लेकिन…।’
नन्हीं लड़की न जाने कब तक क्या-क्या शिकायत करती रहती यदि ऊपर से एक आवाज ने उसे टोका न होता।
ऊपर से आकाशवाणी हुई-‘‘ओ प्यारी नन्हीं लड़की, मैं तुम्हारा दुख समझता हूं।’’ लड़की ने चौंककर आकाश की ओर निहारा।
आकाशवाणी जारी रही-‘‘…पर क्योंकि तुम मेरी विशेष संतान हो इसलिए मैंने तुम्हें धरती पर विशेष प्रयोजन से भेजा है। ऐसी संतान को कष्ट सहने पड़ते हैं और घोर परीक्षाओं से गुजरना पड़ता है। मुझे तुम पर गर्व है। तुमने सारी परीक्षाएं सफलतापूर्वक पार की हैं। अब तुम सुंदर वस्त्रों से सजी हो, जरा अपने बदन की ओर देखो।’’
नन्हीं लड़की ने अपने बदन को निहारा तो दंग रह गई। सचमुच वह अलौकिक रूप से मनमोहक वस्त्रों से ढकी थी।
अब चौंकाने की बारी भगवान की थी।
चमत्कार पर चमत्कार होने लगे। नन्हीं लड़की के सामने स्वादिष्ट व्यंजनों से सजे थाल प्रकट हुए। आकाश से घोषणा हुई-‘‘मेरी प्यारी बच्ची, मैं तुम्हारे माता-पिता को रात के भोजन पर तुम्हारे पास भेजूंगा। वे एक पूरी रात तुम्हारे साथ रहेंगे। और हां, मैं वचन देता हूं कि महीने में एक बार जब तुम इस स्थान पर आओगी, तो वे तुम्हारे साथ एक पूरी रात रहेंगे।’’

नन्हीं लड़की की प्रसन्नता का पारावार न रहा। जब उसने अगले ही क्षण अपने माता-पिता को अपने सामने खड़े पाया। उन्होंने अपनी बेटी को उठाकर बारी-बारी से छाती से लगा लिया और खूब चूमा तथा रोए। खुशी के आंसू तीनों की आंखों में झर रहे थे। मां ने अपने हाथों से नन्हीं लड़की को खाना खिलाना आरंभ किया। तीनों ने साथ-साथ भोजन किया। उस रात नन्हीं लड़की सोई नहीं। माता-पिता भी नहीं सोए। उन्हें भी अपनी बिटिया को बहुत कुछ बताना था।
बातों ही बातों में रात कटती रही।
पौ फटने से पहले एक और चमत्कार हुआ।
वे तीनों आकाश और चांद-सितारों को लेटे-लेटे निहारते हुए बातें कर रहे थे। अकस्मात् झिलमिलाते तारे टूट-टूट कर आकाश से नीचे गिरने लगे। हर तारा जो धरती पर आ गिरा एक सोने के टुकड़े में बदल गया।
मां ने मुस्कराकर बेटी की ओर देखा-
‘‘प्यारी-प्यारी बिटिया। पौ फटते ही हमें यहां से जाना होगा। जितने सोने के टुकड़े तुम बटोर सकती हो, बटोर लो। अपने गांव लौटकर अपने लिए एक प्यारा-सा घर बनाना और सुख से रहना। हां, एक बात और..।’’ उसने प्यार से अपनी बेटी को सहलाते हुए कहा-‘‘तुम्हारे नामकरण से पहले ही हमारी मृत्यु हो गई थी। प्रभु की कृपा से अब वह काम हम कर सकते हैं। अब से तुम्हारा नाम ‘मालती’ होगा। अलविदा प्यारी बिटिया। मालती अलविदा।’’ ऐसा कहते हुए नन्हीं लड़की के माता-पिता लुप्त होने लगे।

मालती ने जब तक उत्तर में अलविदा करने के लिए हाथ उठाया, तब तक वे दोनों लुप्त हो चुके थे। फिर भी नन्हीं मालती को यह आसरा तो था ही कि वह कम से कम महीने में एक बार तो अपने माता-पिता से मिल ही सकेगी। वह पूरी रात उनके साथ बिता सकेगी।
वह काफी देर आकाश की ओर ताकती रही।
फिर मालती अपने गांव लौट आई और एक छोटा सुंदर-सा घर बनवाकर उसमें सुख-चैन से रहने लगी।
अब वह दुनिया की और कुछ भी बात भूल जाए परंतु महीने में एक बार जंगल की खुली जगह पर जाकर अपने माता-पिता के साथ नियत समय पर रात बिताना नहीं भूलती।



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ye kahani ek nanhi si gudiya ki hai
jo har waqt apne sapno mai khoye rehti thi
jiski duniya sirf sapne the
wo din hota chahe raat bas sapno ke
sagar mai doobi rehti
uske liye sapne hi uske khilone the
aur saheliya bhi uske sapne
sahi mai soche to
sapne hi uski duniya ban chuke the shayad
use pariyo ki kahaniyo par bhi vishwas tha
aur use vishwas tha
ki ek din uske sapne pure karne ke liye bhi
koi pari jarur aayegi,,,,,,
aur ek din aisa aaya……
ek pari jo har kisi ke sapno ko jankar khush hoya karti thi
wo is nanhi si gudiya ke sapno ko
dekhkar hairaan reh gayi,,,,,
ek choti si nanhi si gudiya
aur aise sapne ……..
us pari ko vishwas na hua,,,,,
us pari ne kayi bacho ke sapno ko jana tha
jisme kayi khilone mangte the
koi naye kapde ,to koi mithaiya……..
par is nanhi si gudiya ke sapne
hairan pareshan kar gaye unhe,,,,,,
tab ek din wo us gudiya ke sapne mai aayi
aur bola gudiya rani kya chahti ho tum
kya mai tumhe khilone du ya kapde
ya kuch aur achi cheez,,,,,
tab wo gudiya boli nahi pari rani…
mujhe is duniye se bachalo….
Mai is duniye ke liye nahi bani,,,,,
Ye duniya bahut bekar hai,,,,
Yahan par log dusro ko dukh dekar khush hote hai
Yahan par kisi ki muskurahat kisi ki nafrat hoti hai
Yahan sab apne liye jeete hai
Par mai aisi nahi banna chahti,,,,
mujhe is duniye se darr lagta hai,
mai ek apni alag duniya banana chahti hoon
jahan mai har kisi ko khushiyan de pau
jahan mere wajah se kisi ke chere par udassi na aaye
tab pari rani ne kaha,,,,
ki itni choti si aankhon mai itne bade sapne..
tab gudiya rani ne kaha
ki mai har kisi se pyaar karna chahti hoon,..
har kisi ke dil mai pyaar basana chahti hoon
har kisi ki takleef apni baton se
khatam kar dena chahti hoon
tab pari rani ne kaha,,,,,
ki gudiya rani tune sach kaha
kit tu is duniye ke liye nahi bani,,,,,,
kyunki is duniya mai sab apne liye hi
khushiyan mangte hai
kisi ko paisa chahiye to kisi ko apna ghar
par aaj mai tere sapno se bahut khush hui hoon
mai tujhe teri alag duniya dungi
… pls vote and comments mee.



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ज़िंदगी के 20 वर्ष हवा की तरह उड़ जाते हैं.

फिर शुरू
होती है नौकरी की खोज . ये नहीं वो , दूर नहीं
पास . ऐसा करते 2-3 नौकरीयां छोड़ते पकड़ते , अंत में
एक तय होती है. और ज़िंदगी में थोड़ी स्थिरता की
शुरूआत होती है.

और हाथ में आता है पहली तनख्वाह का चेक , वह बैंक
में जमा होता है और शुरू होता है अकाउंट में जमा होने
वाले कुछ शून्यों का अंतहीन खेल.
इस तरह 2-3 वर्ष निकल जाते हैँ . ‘वो’ स्थिर होता है.

बैंक में कुछ और शून्य जमा हो जाते हैं. इतने में आयु
पच्चीस वर्ष हो जाते हैं.

विवाह की चर्चा शुरू हो जाती है. एक खुद की या
माता पिता की पसंद की लड़की से यथा समय
विवाह होता है और ज़िंदगी की राम कहानी शुरू हो
जाती है.

शादी के पहले 2-3 साल नर्म , गुलाबी , रसीले और
सपनीले गुज़रते हैं .

हाथों में हाथ डालकर बातें और रंग बिरंगे सपने . पर ये
दिन जल्दी ही उड़ जाते हैं. और इसी समय शायद बैंक में
कुछ शून्य कम होते हैं. क्योंकि थोड़ी मौजमस्ती,
घूमनाफिरना , खरीदी होती है.

और फिर धीरे से बच्चे के आने की आहट होती है और
वर्ष भर में पालना झूलने लगता है.
सारा ध्यान अब बच्चे पर केंद्रित हो जाता है. उसका
खाना पीना , उठना बैठना , शु शु पाॅटी , उसके
खिलौने, कपड़े और उसका लाड़ दुलार. समय कैसे
फटाफट निकल जाता है.

इन सब में कब इसका हाथ उसके हाथ से निकल गया,
बातें करना , घूमना फिरना कब बंद हो गया, दोनों
को ही पता नहीं चला ?

इसी तरह उसकी सुबह होती गयी और. बच्चा बड़ा
होता गया. .. वो बच्चे में व्यस्त होती गई और ये अपने
काम में. घर की किस्त , गाड़ी की किस्त और बच्चे
कि ज़िम्मेदारी . उसकी शिक्षा और भविष्य की
सुविधा. और साथ ही बैंक में शून्य बढ़ाने का टेंशन.

उसने पूरी तरह से अपने आप को काम में झोंक दिया.

बच्चे का स्कूल में एॅडमिशन हुआ और वह बड़ा होने लगा
. उसका पूरा समय बच्चे के साथ बीतने लगा.

इतने में वो पैंतीस का हो गया. खूद का घर , गाड़ी
और बैंक में कई सारे शून्य. फिर भी कुछ कमी है, पर वो
क्या है समझ में नहीं आता. इस तरह उसकी चिढ़ चिढ़
बढ़ती जाती है और ये भी उदासीन रहने लगा.

दिन पर दिन बीतते गए , बच्चा बड़ा होता गया और
उसका खुद का एक संसार तैयार हो गया. उसकी
दसवीं आई और चली गयी. तब तक दोनों ही चालीस
के हो गए. बैंक में शून्य बढ़ता ही जा रहा है.

एक नितांत एकांत क्षण में उसे गुज़रे दिन याद आते हैं
और वो मौका देखकर उससे कहता है ‘
अरे ज़रा यहां आओ ,
पास बैठो .
चलो फिर एक बार हाथों में हाथ ले कर बातें करें ,
कहीं घूम के आएं …. उसने अजीब नज़रों से उसको देखा
और कहा ” तुम्हें कभी भी कुछ भी सूझता है . मुझे ढेर
सा काम पड़ा है और तुम्हें बातों की सूझ रही है ” .

कमर में पल्लू खोंस कर वो निकल गई .
और फिर आता है पैंतालीसवां साल , आंखों पर चश्मा
लग गया .बाल अपना काला रंग छोड़ने लगे, दिमाग में
कुछ उलझनें शुरू ही थीं. . . . . बेटा अब काॅलेज में है.

बैंक
में शून्य बढ़ रहे हैं. उसने अपना नाम कीर्तन मंडली में
डाल दिया और . . . .
बेटे का college खत्म हो गया , अपने पैरों पर खड़ा हो
गया. अब उसके पर फूट गये और वो एक दिन परदेस उड़
गया…

अब उसके बालों का काला रंग और कभी कभी
दिमाग भी साथ छोड़ने लगा…. उसे भी चश्मा लग
गया था. अब वो उसे उम्र दराज़ लगने लगी क्योंकि
वो खुद भी बूढ़ा हो रहा था.

पचपन के बाद साठ की ओर बढ़ना शुरू था. बैंक में अब
कितने शून्य हो गए, उसे कुछ खबर नहीं है. बाहर आने
जाने के कार्यक्रम अपने आप बंद होने लगे ।

गोली -दवाइयों का दिन और समय निश्चित होने
लगा . डाॅक्टरों की तारीखें भी तय होने लगीं. बच्चे
बड़े होंगे ये सोचकर लिया गया घर भी अब बोझ लगने
लगा.

बच्चे कब वापस आएंगे , अब बस यही हाथ रह
गया था .

और फिर वो एक दिन आता है. वो सोफे पर लेटा ठंडी
हवा का आनंद ले रहा था .

वो शाम की दिया-
बाती कर रही थी . वो देख रही थी कि वो सोफे पर
लेटा है. इतने में फोन की घंटी बजी , उसने लपक के
फोन उठाया .

उस तरफ बेटा था.

बेटा अपनी शादी
की जानकारी देता है और बताता है कि अब वह
परदेस में ही रहेगा. उसने बेटे से बैंक के शून्य के बारे में
क्या करना यह पूछा.

अब चूंकि विदेश के शून्य की
तुलना में उसके शून्य बेटे के लिये शून्य हैं इसलिए उसने
पिता को सलाह दी ” एक काम करिये , इन पैसों का
ट्रस्ट बनाकर वृद्धाश्रम को दे दीजिए और खुद भी
वहीं रहीये”. कुछ औपचारिक बातें करके बेटे ने फोन रख
दिया.

वो पुनः सोफे पर आ कर बैठ गया. उसकी भी दिया
बाती खत्म होने आई थी. उसने उसे आवाज़ दी ” चलो
आज फिर हाथों में हाथ ले के बातें करें ”

वो तुरंत बोली ” बस अभी आई ” उसे विश्वास नहीं
हुआ , चेहरा खुशी से चमक उठा , आंखें भर आईं , उसकी
आंखों से गिरने लगे और गाल भीग गए .

अचानक आंखों की चमक फीकी हो गई और वो
निस्तेज हो गया.

उसने शेष पूजा की और उसके पास आ कर बैठ गई, कहा ”
बोलो क्या बोल रहे थे ” पर उसने कुछ नहीं कहा .

उसने
उसके शरीर को छू कर देखा . शरीर बिल्कुल ठंडा पड़
गया था और वो एकटक उसे देख रहा था .

क्षण भर को वो शून्य हो गई, क्या करूं उसे समझ में नहीं
आया . लेकिन एक-दो मिनट में ही वो चैतन्य हो गई,
धीरे से उठी और पूजाघर में गई . एक अगरबत्ती जलाई
और ईश्वर को प्रणाम किया और फिर से सोफे पे आकर
बैठ गई.

उसका ठंडा हाथ हाथों में लिया और बोली ” चलो
कहां घूमने जाना है और क्या बातें करनी हैं तम्हे ”
बोलो !! ऐसा कहते हुए उसकी आँखें भर आईं. वो एकटक
उसे देखती रही , आंखों से अश्रुधारा बह निकली .
उसका सिर उसके कंधों पर गिर गया. ठंडी हवा का
धीमा झोंका अभी भी चल रहा था …………….

यही जिंदगी है।



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एक बार में अपने एक मित्र का तत्काल केटेगरी में पासपोर्ट बनवाने पासपोर्ट ऑफिस गया था।

लाइन में लग कर हमने पासपोर्ट का तत्काल फार्म लिया, फार्म भर लिया, काफी समय हो चुका था अब हमें पासपोर्ट की फीस जमा करनी थी।
लेकिन जैसे ही हमारा नंबर आया बाबू ने खिड़की बंद कर दी और कहा कि समय खत्म हो चुका है अब कल आइएगा।

मैंने उससे मिन्नतें की, उससे कहा कि आज पूरा दिन हमने खर्च किया है और बस अब केवल फीस जमा कराने की बात रह गई है, कृपया फीस ले लीजिए।

बाबू बिगड़ गया।
कहने लगा, “आपने पूरा दिन खर्च कर दिया तो उसके लिए वो जिम्मेदार है क्या?
अरे सरकार ज्यादा लोगों को बहाल करे।
मैं तो सुबह से अपना काम ही कर रहा हूं।”

खैर, मेरा मित्र बहुत मायूस हुआ और उसने कहा कि चलो अब कल आएंगे।
मैंने उसे रोका, कहा कि रुको एक और कोशिश करता हूं।

बाबू अपना थैला लेकर उठ चुका था। मैंने कुछ कहा नहीं, चुपचाप उसके-पीछे हो लिया। वो एक कैंटीन में गया, वहां उसने अपने थैले से लंच बॉक्स निकाला और धीरे-धीरे अकेला खाने लगा।

मैं उसके सामने की बेंच पर जाकर बैठ गया। मैंने कहा कि तुम्हारे पास तो बहुत काम है, रोज बहुत से नए-नए लोगों से मिलते होगे?
वो कहने लगा कि हां मैं तो एक से एक बड़े अधिकारियों से मिलता हूं।
कई आई.ए.एस., आई.पी.एस., विधायक रोज यहां आते हैं।
मेरी कुर्सी के सामने बड़े-बड़े लोग इंतजार करते हैं।

फिर मैंने उससे पूछा कि एक रोटी तुम्हारी प्लेट से मैं भी खा लूं?
उसने हाँ कहा।
मैंने एक रोटी उसकी प्लेट से उठा ली, और सब्जी के साथ खाने लगा।
मैंने उसके खाने की तारीफ की, और कहा कि तुम्हारी पत्नी बहुत ही स्वादिष्ट खाना पकाती है।

मैंने उसे कहा तुम बहुत महत्वपूर्ण सीट पर बैठे हो। बड़े-बड़े लोग तुम्हारे पास आते हैं।
तो क्या तुम अपनी कुर्सी की इज्जत करते हो? तुम बहुत भाग्यशाली हो, तुम्हें इतनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली है, लेकिन तुम अपने पद की इज्जत नहीं करते।

उसने मुझसे पूछा कि ऐसा कैसे कहा आपने?

मैंने कहा कि जो काम दिया गया है उसकी इज्जत करते तो तुम इस तरह रुखे व्यवहार वाले नहीं होते।

देखो तुम्हारा कोई दोस्त भी नहीं है। तुम दफ्तर की कैंटीन में अकेले खाना खाते हो, अपनी कुर्सी पर भी मायूस होकर बैठे रहते हो, लोगों का होता हुआ काम पूरा करने की जगह अटकाने की कोशिश करते हो।

बाहर गाँव से आ कर सुबह से परेशान हो रहे लोगों के अनुरोध करने पर कहते हो,
“सरकार से कहो कि ज्यादा लोगों को बहाल करे।”
अरे ज्यादा लोगों के बहाल होने से तो तुम्हारी अहमियत घट जाएगी? हो सकता है तुमसे ये काम ही ले लिया जाए।

भगवान ने तुम्हें मौका दिया है रिश्ते बनाने के लिए।
लेकिन अपना दुर्भाग्य देखो, तुम इसका लाभ उठाने की जगह रिश्ते बिगाड़ रहे हो।
मेरा क्या है, कल आ जाउंगा या परसों आ जाउंगा।

पर तुम्हारे पास तो मौका था किसी को अपना अहसानमंद बनाने का। तुम उससे चूक गए।

मैंने कहा कि पैसे तो बहुत कमा लोगे, लेकिन रिश्ते नहीं कमाए तो सब बेकार है।
क्या करोगे पैसों का? अपना व्यवहार ठीक नहीं रखोगे तो तुम्हारे घर वाले भी तुमसे दुखी रहेंगे, यार दोस्त तो पहले से ही नहीं हे।

मेरी बात सुन कर वो रुंआसा हो गया।
उसने कहा कि आपने बात सही कही है साहब। मैं अकेला हूं।
पत्नी झगड़ा कर मायके चली गई है।
बच्चे भी मुझे पसंद नहीं करते।
मां है, वो भी कुछ ज्यादा बात नहीं करती।
सुबह चार-पांच रोटी बना कर दे देती है, और मैं तन्हा खाना खाता हूं। रात में घर जाने का भी मन नहीं करता।
समझ में नहीं आता कि गड़बड़ी कहां है?

मैंने हौले से कहा कि खुद को लोगों से जोड़ो। किसी की मदद कर सकते तो तो करो।
देखो मैं यहां अपने दोस्त के पासपोर्ट के लिए आया हूं।
मेरे पास तो पासपोर्ट है। मैंने दोस्त की खातिर तुम्हारी मिन्नतें कीं। निस्वार्थ भाव से। इसलिए मेरे पास दोस्त हैं, तुम्हारे पास नहीं हैं।

वो उठा और उसने मुझसे कहा कि आप मेरी खिड़की पर पहुंचो। मैं आज ही फार्म जमा करुंगा, और उसने काम कर दिया।
फिर उसने मेरा फोन नंबर मांगा, मैंने दे दिया।

बरसों बीत गए…

इस दिवाली पर एक फोन आया…
रविंद्र कुमार चौधरी बोल रहा हूं साहब, कई साल पहले आप हमारे पास अपने किसी दोस्त के पासपोर्ट के लिए आए थे, और आपने मेरे साथ रोटी भी खाई थी।
आपने कहा था कि पैसे की जगह रिश्ते बनाओ।
मुझे एकदम याद आ गया।
मैंने कहा हां जी चौधरी साहब कैसे हैं?

उसने खुश होकर कहा, “साहब आप उस दिन चले गए, फिर मैं बहुत सोचता रहा।
मुझे लगा कि पैसे तो सचमुच बहुत लोग दे जाते हैं, लेकिन साथ खाना खाने वाला कोई नहीं मिलता।
मैं साहब अगले ही दिन पत्नी के मायके गया, बहुत मिन्नतें कर उसे घर लाया।
वो मान ही नहीं रही थी,
वो खाना खाने बैठी तो मैंने उसकी प्लेट से एक रोटी उठा ली, कहा कि साथ खिलाओगी?
वो हैरान थी। रोने लगी।
मेरे साथ चली आई।
बच्चे भी साथ चले आए।

साहब,
अब मैं पैसे नहीं कमाता।
रिश्ते कमाता हूं।
जो आता है उसका काम कर देता हूं।

साहब आज आपको हैप्पी दिवाली बोलने के लिए फोन किया है।

अगले महीने बिटिया की शादी है।
आपको आना है।
बिटिया को आशीर्वाद देने।
रिश्ता जोड़ा है आपने।

वो बोलता जा रहा था,
मैं सुनता जा रहा था। सोचा नहीं था कि सचमुच उसकी ज़िंदगी में भी पैसों पर रिश्ता इतना भारी पड़ेगा।

दोस्तों
आदमी भावनाओं से
संचालित होता है।
कारणों से नहीं।
कारण से तो मशीनें चला करती है ।

Kisi bhai ne bheji hai. Dil ko choo gayi isliye apko bhej raha hoon…….



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Pls padhe jarur
➰➰➰➰➰➰➰ शायद लिखने वाले ने अपना कलेजा निकाल कर रख दिया है मैं एक दुकान में
खरीददारी कर रहा था,
तभी मैंने उस दुकान के कैशियर को एक 5-6
साल की लड़की से
बात करते हुए देखा |

कैशियर बोला :~
“माफ़ करना बेटी,
लेकिन इस गुड़िया को
खरीदने के लिए
तुम्हारे पास पर्याप्त पैसे नहीं हैं|”

फिर उस छोटी सी
लड़की ने मेरी ओर
मुड़ कर मुझसे पूछा:~

“अंकल,
क्या आपको भी यही लगता है
कि मेरे पास पूरे पैसे नहीं हैं?”

मैंने उसके पैसे गिने
और उससे कहा:~
“हाँ बेटे,
यह सच है कि तुम्हारे पास
इस गुड़िया को खरीदने के लिए पूरे पैसे
नहीं हैं”|

वह नन्ही सी लड़की
अभी भी अपने
हाथों में गुड़िया थामे हुए खड़ी थी |
मुझसे रहा नहीं गया |
इसके बाद मैंने उसके पास जाकर उससे
पूछा कि यह गुड़िया वह किसे
देना चाहती है?

इस पर उसने
उत्तर दिया कि यह
वो गुड़िया है,
जो उसकी बहन को
बहुत प्यारी है |
और वह इसे,
उसके जन्मदिन के लिए उपहार
में देना चाहती है |

बच्ची ने कहा यह गुड़िया पहले मुझे
मेरी मम्मी को देना है,
जो कि बाद में मम्मी
जाकर मेरी बहन को दे देंगी”|

यह कहते-कहते
उसकी आँखें नम हो आईं थी
मेरी बहन भगवान के घर गयी है…

और मेरे पापा कहते हैं
कि मेरी मम्मी भी जल्दी-ही भगवान से
मिलने जाने वाली हैं|
तो, मैंने सोचा कि
क्यों ना वो इस
गुड़िया को अपने साथ ले जाकर, मेरी बहन
को दे दें…|”

मेरा दिल धक्क-सा रह गया था |

उसने ये सारी बातें
एक साँस में ही कह डालीं
और फिर मेरी ओर देखकर बोली –
“मैंने पापा से कह दिया है कि मम्मी से
कहना कि वो अभी ना जाएँ|

वो मेरा,
दुकान से लौटने तक का
इंतजार
करें|

फिर उसने मुझे एक बहुत प्यारा-
सा फोटो दिखाया जिसमें वह
खिलखिला कर हँस
रही थी |

इसके बाद उसने मुझसे कहा:~
“मैं चाहती हूँ कि मेरी मम्मी,
मेरी यह
फोटो भी अपने साथ ले जायें,
ताकि मेरी बहन मुझे भूल नहीं पाए|
मैं अपनी मम्मी से बहुत प्यार करती हूँ और
मुझे नहीं लगता कि वो मुझे ऐसे छोड़ने के
लिए राजी होंगी,
पर पापा कहते हैं कि
मम्मी को मेरी छोटी
बहन के साथ रहने के
लिए जाना ही पड़ेगा क्योंकि वो बहुत छोटी है, मुझसे भी छोटी है | उसने धीमी आवाज मैं बोला।

इसके बाद फिर से उसने उस
गुड़िया को ग़मगीन आँखों-से खामोशी-से
देखा|

मेरे हाथ जल्दी से
अपने बटुए ( पर्स ) तक
पहुँचे और मैंने उससे कहा:~

“चलो एक बार
और गिनती करके देखते हैं
कि तुम्हारे पास गुड़िया के
लिए पर्याप्त पैसे हैं या नहीं?”

उसने कहा-:”ठीक है|
पर मुझे लगता है
शायद मेरे पास पूरे पैसे हैं”|

इसके बाद मैंने
उससे नजरें बचाकर
कुछ पैसे
उसमें जोड़ दिए और
फिर हमने उन्हें
गिनना शुरू किया |

ये पैसे उसकी
गुड़िया के लिए काफी थे
यही नहीं,
कुछ पैसे अतिरिक्त
बच भी गए
थेl |

नन्ही-सी लड़की ने कहा:~
“भगवान्
का लाख-लाख शुक्र है
मुझे इतने सारे पैसे
देने के लिए!

फिर उसने
मेरी ओर देख कर
कहा कि मैंने कल
रात सोने से पहले भगवान् से
प्रार्थना की थी कि मुझे इस
गुड़िया को खरीदने के
लिए पैसे दे देना,
ताकि मम्मी इसे
मेरी बहन को दे सकें |
और भगवान् ने मेरी बात सुन ली|

इसके अलावा
मुझे मम्मी के लिए
एक सफ़ेद गुलाब
खरीदने के लिए भी पैसे चाहिए थे, पर मैं भगवान से
इतने ज्यादा पैसे मांगने
की हिम्मत नहीं कर पायी थी
पर भगवान् ने तो
मुझे इतने पैसे दे दिए हैं
कि अब मैं गुड़िया के साथ-साथ एक सफ़ेद
गुलाब भी खरीद सकती हूँ !
मेरी मम्मी को सफेद गुलाब बहुत पसंद हैं|

“फिर हम वहा से निकल गए |
मैं अपने दिमाग से उस छोटी-
सी लड़की को
निकाल नहीं पा रहा था |

फिर,मुझे दो दिन पहले
स्थानीय समाचार
पत्र में छपी एक
घटना याद आ गयी
जिसमें
एक शराबी
ट्रक ड्राईवर के बारे में
लिखा था|

जिसने नशे की हालत में
मोबाईल फोन पर
बात करते हुए एक कार-चालक
महिला की कार को
टक्कर मार दी थी,
जिसमें उसकी 3 साल
की बेटी की
घटनास्थल पर ही
मृत्यु
हो गयी थी
और वह महिला कोमा में
चली गयी थी|
अब एक महत्वपूर्ण निर्णय उस परिवार
को ये लेना था कि,
उस महिला को जीवन
रक्षक मशीन पर बनाए रखना है
अथवा नहीं?
क्योंकि वह कोमा से बाहर
आकर,
स्वस्थ हो सकने की
अवस्था में
नहीं थी | दोनों पैर , एक हाथ,आधा चेहरा कट चुका था । आॅखें जा चुकी थी ।

“क्या वह परिवार इसी छोटी-
लड़की का ही था?”

मेरा मन रोम-रोम काँप उठा |
मेरी उस नन्ही लड़की
के साथ हुई मुलाक़ात के 2 दिनों बाद मैंने अखबार में
पढ़ा कि उस
महिला को बचाया नहीं जा सका,

मैं अपने आप को
रोक नहीं सका और अखबार
में दिए पते पर जा पहुँचा,
जहाँ उस महिला को
अंतिम दर्शन के लिए
रखा गया था
वह महिला श्वेत धवल
कपड़ों में थी-
अपने हाथ में
एक सफ़ेद गुलाब
और उस छोटी-सी लड़की का वही हॅसता हुआ
फोटो लिए हुए और उसके सीने पर रखी हुई
थी –
वही गुड़िया |
मेरी आँखे नम हो गयी । दुकान में मिली बच्ची और सामने मृत ये महिला से मेरा तो कोई वास्ता नही था लेकिन हूं तो इंसान ही ।ये सब देखने के बाद अपने आप को सभांलना एक बडी चुनौती थी
मैं नम आँखें लेकर वहाँ से लौटा|

उस नन्ही-सी लड़की का
अपनी माँ और
उसकी बहन के लिए
जो बेपनाह अगाध प्यार था,
वह शब्दों में
बयान करना मुश्किल है |

और ऐसे में,
एक शराबी चालक ने
अपनी घोर
लापरवाही से क्षण-भर में
उस लड़की से
उसका सब कुछ
छीन लिया था….!!!

ये दुख रोज कितने परिवारों की सच्चाइ बनता है मुझे पता नहीं!!!! शायद ये मार्मिक घटना
सिर्फ
एक पैग़ाम
देना चाहती है कि:::::::::::::

कृपया~~~

कभी भी शराब
पीकर और
मोबाइल पर बात
करते समय
वाहन ना चलायें
क्यूँकि आपका आनन्द
किसी के लिए
श्राप साबित हो सकता हैँ।
I riqst u
इस पोस्ट को
पढ़कर यदि आप
‘भावुक’ हुऐ
हों तो किसी भी एक व्यक्ति को शेयर’
जरूर करें



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एक बार एक आदमी बड़ी आराम से अपनी गाड़ी में
जा रहा था कि अचानक सामने से आ रही एक
महिला की गाड़ी आ कर उसकी गाड़ी से
टकरा गयी, पर एक्सिडेंट के बाद दोनों सुरक्षित
बच गए।
🚗🚘
जब दोनों गाड़ी से बाहर आये तो महिला ने पहले
अपनी गाड़ी को देखा जो पूरी तरह क्षतिग्रस्त
हो चुकी थी, फिर वो सामने की तरफ
गयी जहाँ आदमी भी अपनी गाड़ी को बड़ी गौर
से देख रहा था।
🚕🚗
तभी वह महिला उससे रूबरू होते हुए बोली,
“देखिये कैसा संयोग है कि गाड़ियाँ पूरी तरह से
टूट-फूट गयी पर हमें चोट तक नहीं आई। यह सब
भगवान की मर्जी से हुआ है ताकि हम दोनों मिल
सकें। मुझे लगता है कि अब हमें आपस में दोस्ती कर
लेनी चाहिए।
😘😘
आदमी ने भी सोचा कि इतना नुक्सान होने के
बाद भी गुस्सा करने के बजाय दोस्ती के लिए कह
रही है तो कर लेता हूँ और बोला, “आप बिल्कुल
ठीक कह रही हैं कि ये सब भगवान की मर्जी से
हुआ है।”
🌹🌹
तभी महिला ने कहा, “एक चमत्कार और देखिये
कि पूरी गाड़ी टूट-फूट गयी पर अंदर रखी शराब
की बोतल बिल्कुल सही है।”
🍺🍻
आदमी ने कहा, “वाकई यह तो हैरान करने
वाली बात है।” महिला ने बोतल खोली और
बोली, “आज हमारी जान बची है,
हमारी दोस्ती हुई है तो क्यों न
थोड़ी सी ख़ुशी मनाई जाए।”
🍺🍺
महिला ने बोतल को उस आदमी की तरफ
बढ़ाया उसने भी बोतल को पकड़ा और मुहं से
लगाया और आधी करके बोतल वापस
महिला को दे दी। फिर कहने लगा, “आप
भी लीजिये।”
😜😜
महिला ने बोतल को पकड़ा उसका ढक्कन बंद
किया और एक तरफ रख दी।

आदमी ने पूछा, “क्या आप शराब नहीं पियेंगी?”
महिला बड़े आराम से बोली, “नहीं …मुझे लगता है
मुझे पुलिस का इंतज़ार करना चाहिए ताकि मैं
बता सकूँ कि इस शराबी ने मेरी गाडी ठोक
दी है।”

मोरल: और करो लड़कियों पर भरोसा !!!😜🍺🌹😘🍻🚗😄🙏🚕🚘👍🌻🍁🌼😊



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*************
Inspiring story.. A Beautiful Message🌿

Arthur Ashe, The Legendary Wimbledon Player was dying of AIDS

which he got due to Infected Blood he received during a Heart Surgery in 1983!

He received letters from his fans, one of which conveyed:

“Why did God have to select you for such a bad disease??”

To this Arthur Ashe replied:

50 Million children started playing Tennis,

5 Million learnt to play Tennis,

500 000 learnt Professional Tennis,

50 Thousand came to Circuit,

5 Thousand reached Grandslam,

50 reached Wimbledon,

4 reached the Semifinals,

2 reached the Finals and

when I was holding the cup in my hand,

I never asked God
“Why Me?”

So now that I’m in pain how can I ask God “Why Me?”

Happiness keeps you Sweet!!

Trials keeps you Strong!!

Sorrows keeps you Human!!

Failure keeps you Humble!!

Success keeps you Glowing!!

But only,
Faith keeps you Going.

Sometimes you are
unsatisfied with your life,

while many people in
this world are dreaming
of living your life..

A child on a farm sees
a plane fly overhead &
dreams of flying.

But,
A pilot on the plane sees
the farmhouse & dreams
of returning home.

That’s life!!
Enjoy yours…

If wealth is the secret to
happiness,

then the rich should be dancing on the streets.

But only poor kids
do that.👍

If power ensures security,
then VIPs should walk
unguarded.

But those who live simply, sleep soundly.

If beauty and fame bring
ideal relationships,

then celebrities should have the best marriages.

Live simply.
Walk humbly.
and love genuinely..!



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