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पीओके में सीमा पार जाकर सेना की साहसिक कार्रवाही पर कवि की रचना---- राष्ट्रद्रोह के रावण की सांसो का घोडा ठहर गया सरहद पार तिरंगा अपना स्वाभिमान से लहर गया आतंकवाद से लड़ने की शक्ति आई दरबार में इसीलिए सेना ने मारा एलओसी के पार में आज सियासत बदल गई है डरते डरते जीने की उग्रवाद ने नाप देख ली छप्पन इंची सीने की अरेशरीफों आँख खोलकर समझो जरा इशारों को राख समझकर अब मत छूना दुबे के अंगारों को वर्ना घायल रावलपिंडी अपना खुदा पुकारेगी जब भारत की सेना अबकी अंदर घुसकर मारेगी लाल रंग के बलिदानों से अजर अमर यह खाकी है अरे मियां ये ट्रेलर है पूरी पिक्चर तो बाकी है (सेना के सम्मान में जय हिन्द)।
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